NCERT Hindi Class 10 Chapter 1 Sakhi CBSE Board Sample Problems Long Answers (For CBSE, ICSE, IAS, NET, NRA 2022)

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1 कबीरदास ने ईश्वरीय वियोग की स्थिति का चित्रण किस प्रकार किया है?

उत्तर-जिस व्यक्ति के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम रूपी विरह का सर्प बस जाता है उस पर कोई मंत्र असर नहीं करता है। स्वाभाविक चित्रण है कि शरीर के भीतर रोग का कारक होने पर उपचार नहीं हो पाता है अर्थात भगवान के विरह में कोई भी जीव सामान्य नहीं रहता है। उस पर किसी बात का कोई असर नहीं होता है।

2 कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-कबीर ने अपनी साखियाप सधुक्कड़ी भाषा में लिखी है। इनकी भाषा मिलीजुली है। इनकी साखियाप संदेश देने वाली होती हैं। वे जैसा बोलते थे वैसा ही लिखा है। लोकभाषा का भी प्रयोग हुआ है जैसे- खायै मुवा आल्या आपगणि आदि भाषा में लयबद्धता उपदेशात्मकता प्रवाह सहज सरल शैली है।

3 ईश्वर कण-कण में व्याप्त है पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?

उत्तर-हमारा मन अज्ञानता अहंकार विलासिताओं में डूबा रहता है। हमारे जीने का उद्देश्य भौतिक प्रगति ही करना है। हम ईश्वर को मंदिर मस्जिद जैसी बाहरी दुनिया में ढूंढते हैं जबकि वह सब ओर व्याप्त है। इस कारण हम ईश्वर को नहीं देख पाते हैं।

4 संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन यहाप सोना और जागना किसके प्रतीक हैं?

उत्तर-कवि के अनुसार संसार में वे लोग सुखी हैं जो संसार में व्याप्त सुख-सुविधाओं का भोग करते हैं और दुखी वे हैं जो ईश्वर और संसार के बारे में सोच रहे हैं। सोना अज्ञानता का प्रतीक है और जागना ज्ञान का प्रतीक है। जो लोग सांसारिक सुखों में खोए रहते हैं जीवन के भौतिक सुखों में लिप्त रहते हैं वे सोए हुए हैं और जो सांसारिक सुखों को व्यर्थ समझते हैं अपने को ईश्वर के प्रति समर्पित करते हैं वे ही जागते हैं। वे संसार की दुर्दशा को दूर करने के लिए चिंतित रहते हैं।

5 कबीर की साखियों की आज के समय में उपयोगिता स्पष्ट कीजिए

उत्तर-आज के समाज में व्याप्त कुरीतियों बुराईयों को कबीरदास के दोहे मार्ग दिखाने में सहायक होंगे। सत्य मीठा बोलना माया अर्थात भौतिकता से दूरी बनाए रखना ईश्वर को पाने का प्रयास करना अपनी बुराइयों को समाप्त कर लेना अहंकार का विनाश दिखावे की समाप्ति आदि आज भी उपयोगिता है।

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