NCERT Class 10 Hindi Chapter 1 Sparsh Kabhi Sakhi Exercise Solutions Part 2 Explained in Detailed

हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 1) (कबीर-साखी) (कक्षा 10) प्रश्न अभ्यास Part 2

प्रश्न 5 :

अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया हैं?

उत्तर 5 :

अपने व्यवहार को शांत एंव साफ रखने के लिए कवि यह कह रहा है कि हमें अपनी स्वयं की बुराई करने के लिए हमें किसी बुराई करने वाले व्यक्ति को अपने पास रखना चाहिए जो हर समय हमारी बुराई करता रहे, इससे हमारे अंदर छीपी हुई हर बुराई का अंत अपने आप ही हो जाएगा। अत: हमारे अंदर बुराई वाले भाव स्वत: ही समाप्त हो जायेगें और हमारा मन बिल्कुल शांत, निर्मल तथा शुद्ध हो जाएगा।

प्रश्न 6 :

’ऐके अषिर पीव का, पढै सु पंडित होई’- इस पंक्ति दव्ारा कवि क्या कहना चाहता है।

उत्तर 6:

प्रस्तुत पंक्ति के दव्ारा कवि हमें भगवान के प्रेम के संबंध के बारे में बता रहे हैं। कवि का मानना है कि भगवान के प्रेम के माध्यम से ही हमें ज्ञान व मुक्ति मिल सकती है अर्थात सही राह व आजादी मिल सकती हैं अन्यथा हम बिना ज्ञान के भटकते ही रहेगे हमें कभी भी मुक्ति नहीं मिल पाएगी। इसलिए व्यक्ति के जीवन में ईश्वर के प्रेम का होना बहुत आवश्यक हैं।

प्रश्न 7 :

कबीर की उद्धत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर 7:

कबीरदास जी की भाषा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके काव्य में अभिव्यक्ति की निर्भीकता है। अर्थात कुछ भी कहने की निडरता हैं। अपनी शिक्षा के बारे में बताते हुए कवि कह रहे हे कि -’मसि काबद छुयो नहीं, कलम गही नहीं हाथ’ अर्थात कवि ने कहा है कि उन्होंने कभी भी कागज और कलम को हाथ तक नहीं लगाया है। कवि ने अपनी भाषा को सधुक्कड़ी अर्थात साधु संतों की मिली जुली भाषा कहा हैं और कहीं पर कबीर ने अपनी भाषा को खिचड़ी एवं संध्या भाषा भी कहा गया है। क्योंकि कबीर की भाषा में एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग मिलता है। उनकी भाषा में एक ऐसी सुन्दरता है जो कहीं ओर देखने को नहीं मिलती हैं। हृदय/मन से निकली हुई अभिव्यक्तियों के कारण उनकी भाषा सरल, सहज और मन पर सीधी प्रभाव करने वाली होती है। इसके अलावा कबीर की भाषा एक से अधिक होने से उनकी भाषा में प्रवाह देखने को मिलता हैं।

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