हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 1) (प्रेमचन्द्र-बड़े भाई साहब) (कक्षा 10) खंड-ख

प्रश्न 1 :

बड़े भाई की डाँट फटकार अगर न मिलती तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर 1:

छोटा भाई आरंभ से चचंल स्वाभाव का था। उसका मन हमेशा खेलकुद में ज्यादा लगता था, पर वह पढ़ाई में भी बहुत होशियार था। इसलिए वह पढ़ाई के साथ-साथ घूमने-फिरने में भी ज्यादा समय बीताता था। इसी कारण से बड़े भाई साहब छोटे भाई को डांटते रहते थे कि वह अपना पूरा ध्यान केवल पढ़ाई में लगाये। जिनके डर से छोटा भाई पढ़ने बैठ जाता था। साथ में बडे भाई उसको अपने आप पर घमंड न करने की बात भी कहते रहते थे। इसलिए बड़े भैया के डर व शिक्षा के कारण वह कक्षा में हमेशा प्रथम आता था।

प्रश्न 2:

इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया हैं? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?

उत्तर 2:

लेखक ने समूची शिक्षा के तौर-तरीकों पर निम्न रूप से व्यंग्य किया हैं-

Ø लेखक के अनुसार यह शिक्षा व्यावहारिक नहीं हैं। यह एक तरह की रंटने वाली विद्या हैं। अर्थात रंटत ज्ञान है जिसमें समझ में कुछ भी नहीं आता हैं केवल रटना पड़ता हैं। इसलिए कहते है न ’रंटत विद्या फलंत नाही’ अर्थात रटने वाली विद्या कभी नहीं फलती हैं।

Ø यहां लेखक के मुताबिक केवल उत्तर पुस्तिका के आधार पर छोटे का मुल्यांकन किया गया हैं। जबकि किसी भी बच्चे का मूल्यांकन केवल उत्तर पुस्तिका भर से ही नहीं किया जा सकता हैं उसके अलावा खेलकूद एवं उसकी अन्य गतिविधियों के आधार से भी एक बच्चे का मूल्याकन किया जाता हैं।

Ø लेखक के अनुसार निरर्थक विषयों को पढ़ाया जाता हैं। अर्थात जिन विषयों का अर्थ नहीं होता उन विषयों को पढ़ाया जाता हैं।

Ø लेखक के मुताबिक हम उनके विचारों से पूर्व रूप से सहमत हैं। अर्थात बड़े भाई ने छोटे भाई को पढ़ाई करने के लिए सलाह दी है उसके लिए पूरी तरह से सहमत हैं

Ø क्योंकि इस प्रकिया में छात्र का पूर्ण रूप से मूल्यांकन नहीं हो पाता हैं। अर्थात लेखक के अनुसार बड़े भैया केवल उसकी उत्तर पुस्तिका से ही उसका मूल्यांकन करते हैं। इसी कारण प्रस्तुत प्रक्रिया में छात्र का पूरा मूल्यांकन नहीं हो पाता हैं।

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