हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 2) (सीताराम सेकरिया-डायरी का एक पन्ना) (कक्षा 10) खंड-ख

प्रश्न 1:

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

उत्तर 1:

सुभाष बाबू के जुलूस में औरतों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। स्थान-स्थान में औरतें अपना जुलूस निकालने तथा उचित जगह पर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। महिलाओं ने मोनुमेंट नामक स्थान की सीढ़ियों पर तिरंगा फहराया और घोषाणाएं पढ़ कर सुनाने लगी। मोनुमेंट में बड़ी संख्या में औरतें झंडे पकड़े खड़ी हुई थीं। धर्मतल्ले के मोड़ पर महिलाओं ने धरना दिया अर्थात मुड़ाव में धरना पदर्शन किया। फिर पुलिस ने औरतों को पकड़कर लाला बाजार भेज दिया। कुल मिलाकर 105 औरतोंं की गिरफ्तारी की गई थीं। इससे पहले एक साथ इतनी भारी संख्या में कभी महिलाओं की गिरफ्तार नहीं की गई थीं।

प्रश्न 2:

जुलूस के लाल बाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?

उत्तर 2:

पुलिस के लाल बाजार जाने पर पुलिस के माध्यम से वृजलाला गोयनका नामक व्यक्ति को पकड़ा गया। पहले वह तिंरगा को लेकर वंदेमातरम बोलने लगा फिर बोलते हुए मोनुमेंट की ओर बढ़ने लगा, उसे एक अंग्रेज ने लाठी के दव्ारा मारा फिर उसे पकड़कर कुछ दूरी पर ले जाकर छोड़ दिया गया। वहां उसने महिलाओं के जुलूस में सम्मिलित होकर 200 व्यक्तियों का जुलूस बनाकर लाल बाजार की ओर निकला और वहाँ जाकर पुलिस दव्ारा गिरफ्तार कर लिया गया। कुल मिलाकार 105 महिलाएं पुलिस के माध्यम से गिरफ्तार की कर ली गई, जिन्हें बाद में रात को 9 बजे छोड़ दिया गया।

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