NCERT Class 10 Hindi Detailed Solutions of Sparsh Chapter 11 Dairy ka ek Panna Part 4

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हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 2) (सीताराम सेकरिया-डायरी का एक पन्ना) (कक्षा 10)

प्रश्न 3:

’जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और सभा तो कहना चाहिए कि खुली हुई लड़ाई थीं’ यहां पर कौन से और किसके दव्ारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है। क्या कानून भंंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर 3:

यहाँ पर अंग्रेजों के बनाए कानून को भंग करने की बात कही गई है। पुलिस अधिकारी की सूचना थी कि फलां-फलां धारा के अनुसार कोई सभा नहीं की जा सकती है। जो भी व्यक्ति सभा में हिस्सा लेगा वह आरोपी कहलाएगा। सरकार के इस कानून को भंग करना ही उचित था क्योंकि कोई लोकतांत्रिक सरकार अपने नागरिकों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं छीन सकती है। अर्थात सरकार किसी भी नागरिक की बोलने की आज़ादी छीन नहीं सकती हैं। जनता सभा, प्रदर्शन जुलूस के दव्ारा अपनी नारजगी जताती है। तात्पर्य यह है कि जनता अपना गुस्सा सरकार को सभा, जुलूस आदि के माध्यम से बताती है। उनके मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित करना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। अर्थात जनता के मौलिक अधिकाराेें में सरकार बंदिश नहीं लगा सकती हैं। अंग्रेजी सरकार तानाशाह की तरह केवल अपने हित के बारे में सोचती थीं। अर्थात सरकार केवल झगड़े के तहत भी अपने हित के बारे में सोचती है जिससे अंग्रेजी सरकार का अपना स्वार्थ पूरा हो सके। उन्हें स्वार्थ के रहते जनता की कोई भी परवाह नहीं होती हैं।

प्रश्न 4:

बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप (जेल) में रखा गया, बहुत सी स्त्रियां जेल गई, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों हैं? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर 4:

इस दिन के अपूर्व होने का महत्वपूर्ण कारण यह था कि बंगाल या कलकत्ता के नाम पर यह दाग था कि यहां पर अंग्रेजों के विरूद्ध कोई काम नहीं हो रहा था। इस जुलूस के बाद यह दाग काफी हद तक दूर हो गया था। लोगों की सोच विचार में परिवर्तन आया और यहां की औरतों ने भी बढ़-चढ़कर आंदोलन में हिस्सा लिया था। लाल बाजार के जेल में औरतों की बड़ी भारी संख्या के कारण इस दिन को बहुत खास माना गया हैं।