हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 2) (सीताराम सेकरिया-डायरी का एक पन्ना) (कक्षा 10) आशय स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1.

आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया हैं।

उत्तर 1:

लेखक के मुताबिक बंगाल में आज जिस तरह अंग्रेजो के खिलाफ इतना जोर शोर से प्रदर्शन हुआ वह अपने आप में एक खास था। इससे पहले इतने बड़े स्तर पर आंदोलन कभी नहीं हुआ था। यह बंगाल के नाम पर कलंक, धब्बा और दाग था कि यहाँ आज़ादी के नाम पर कुछ भी किसी भी प्रकार कार्य नहीं किया जाता था। इस प्रदर्शन के दव्ारा यह दाग कुछ हद तक साफ हो गया था।

प्रश्न 2:

खुली चुनौती देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थीं।

उत्तर 2:

पुलिस की चेतवानी थी कि कहीं पर भी कोई सभा आयोजित नहीं की जाएगी। आंदोलन में हिस्सा लेने वालों को आरोपी समझा जाएगा। इसके बावजूद कौसिल का आदेश था कि ठीक चार बजकर 24 मिनिट पर तिंरगा लहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। यह सत्ता को खुले रूप से चुनौती दी गई थी क्योंकि इससे पहले सत्ता को चुनौती देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी। अर्थात इससे पहले कभी भी सरकार को खुले तौर ऐसी चुनौती नहीं दी गई थीं।

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