हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 3) (लीलाधर मंडलोई-तताँरा वामीरों कथा) (कक्षा 10) खंड-ख

प्रश्न 1:

निकोबार दव्ीप समूह के विभक्त होने के बारे में निकोबारियों का क्या विश्वास है?

उत्तर 1:

निकोबार दव्ीप समूह के विभक्त होने के बारे में निकोबारियों का यह विश्वास है कि निकोबार दव्ीप समूह का पहला प्रमुख दव्ीप है -कार निकोबार। निकोबारियों का भरोसा है कि पहले यह दोनों दव्ीप एक ही थे इसके अलग होने की कहानी तताँरा-वामीरों से जुड़ी हुई हैं। दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे पर गांव के रीति-रिवाजों व परंपराओं के कारण दोनों की शादी नहीं हो सकती थी। गांव वालों के माध्यम से दोनों का अपमान होने के कारण ततांरा ने गुस्से में आकार अपनी दैवीय तलवार से भूमि पर एक रेखा खींच दी, जिसके कारण भूमि का एक हिस्सा अलग होकर निकाबार दव्ीप समूह बन गया। अर्थात भूमि का एक भाग निकोबार दव्ीप समूह में बदल गया। अत: उस भाग को लोग निकोबार दव्ीप समूह से जानने लगे।

प्रश्न 2:

तताँरा खूब परिश्रम करने के बाद कहाँ गया? वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर 2:

तताँरा दिन भर परिश्रम व मेहनत करने के बाद समुद्र के किनारें घूमने के लिए निकल पड़ता था। सूरज समुद्र से लगे क्षितिज में डूबने के लिए तैयार था अर्थात सूर्य समुद्र में ढलने को तैयार था। समुद्र से शीतलमय हवाएं आ रही थीं। पक्षियों की चहचहानें की आवाजें शाम को धीरें-धीरें शांत होने लगी थीं। तताँरा विचार में मग्न होकर समुद्री रेत पर बैठकर रंग-बिरंगी किरणों की समुद्री सुंदरता का मजा लेने लगा था। तभी कहीं पास से उसे मधुर संगीत का स्वर सुनाई दिया अर्थात मीठा संगीत सुनाई दिया, जिस मीठे संगीत ने तताँरा को आकर्षित कर दिया। उसे लगा कि धीमें-धीमें वह मधुर स्वर उसकी ओर बढ़ रहा है। अर्थात तताँरा को ऐसा प्रतीत हुआ कि मानों जैसे वह मधुर संगीत उसके अंदर समा रहा हो। इस प्रकार तताँरा ने प्रकृति की सुन्दरता का वर्णन किया।

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