हिन्दी (स्पर्श) (पाठ 3) (बिहारी-दोहे) (कक्षा 10) भाव स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1:

मनौ नीलमनि सैल पर आतुप पर्‌यो प्रभात।

उत्तर 1:

प्रस्तुत भाव में बिहारी ने यह बताया है कि कृष्ण जी ने पीले कपड़े पहन रखे हैं और कृष्ण जी का रंग साँवला हैं एवं राधा का रंग गौरा है अर्थात जब गोरी राधा की परछाई श्रीकृष्ण जी पर पड़ती हैं अर्थात राधा जी कृष्ण जी के पास जाती हैं तो ऐसा लगता कि मानों नीलमणि पर्वत पर सुबह की पहली किरण पड़ी हो और सेवरा हो गया हो। यहां पर दोहा छंद अनुप्रास अलंकार का अच्छा प्रयोग किया गया हैं।

प्रश्न 2 :

जगतु तपोवन सो किर्या दीरघ-दाघ निदाघ।

उत्तर 2:

धरती पर पड़ती भीषण गर्मी के कारण सभी जीव जन्तु जैसे पशु पक्षी अपनी जान बचाने के लिए छाया खोजने के लिए एक जगह में आकर बैठ जाते हैं और आपस में भयंकर शत्रु होने पर भी वे एक दूसरे पर प्रहार नहीं कर रहे हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है किसारा जग ही तपोवन बन गया है।

प्रश्न 3:

जपमाला, छापै मिलक सरै न एको कामु।

मन-काँचै नार्च वृथा, साँचै राँचै रामु।

उत्तर 3 :

प्रस्तुत दोहे में कवि बिहारी ने कहा है कि केवल माला जपने और माथे में टीका लगाने से कुछ नहीं होता है क्योंकि उस समय हमार पूरा ध्यान संसार की मोह माया, भोग विलास आदि के चक्करों में पड़ा रहता है और हमारा मन यहां-वहां भटकता रहता हैं। अर्थात हमारा मन भगवान की भक्ति में नहीं लगता हैं। अगर हम सच्चे मन से भक्ति भाव से ईश्वर को याद करें तो हमारे हृदय में अपने आप ही भगवान राम का वास हो जाएगा। अर्थात अगर हमारा मन भगवान के प्रति सही रूप में सच्चा हैं तो ईश्वर का वास हमारे मन में स्वत: ही हो जाएगा।

Explore Solutions for Hindi

Sign In