NCERT class 9 Hindi Chapter 2 Part 1 कक्षा 9 एनसीईआरटी पाठ-2

Download PDF of This Page (Size: 173K)

प्रश्न 1

’रस्सी यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?

उत्तर

यहाँ रस्सी से कवयित्री का तात्पर्य स्वयं के इस नाशवान शरीर से है। उनके अनुसार यह शरीर सदा साथ नहीं रहता यह कच्चे धागे की भाँति है जो कभी भी साथ छोड़ देता है और इसी कच्चे धागे से वह जीवन नैया पार करने की कोशिश कर रही है।

प्रश्न 2

कवयित्री दव्ारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं?

उत्तर

कवयित्री के कच्चेपन के कारण उसके मुक्ति के सारे प्रयास विफल हो रहे हैं अर्थात्‌ उसमें अभी पूर्ण रूप से प्रौढ़ता नहीं आई है जिसकी वजह से उसके प्रभु से मिलने के सारे प्रयास व्यर्थ हैं। वह कच्ची मिट्‌टी के उस बर्तन की तरह है जिस पर रखा जल टपकता रहा है और यही दर्द उसके हृदय में दु:ख संचार करता रहा है, उसके प्रभु से उसे मिलने नहीं देता रहा।

प्रश्न 3

कवयित्री का ’घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य हैं?

उत्तर

कवयित्री का ’घर जाने की चाह’ से तात्पर्य प्रभु मिलन से है। उसके अनुसार जहाँ प्रभु हैं वहीं उसका वास्तविक अर्थात्‌ असली घर हैं।

प्रश्न 4

भाव स्पष्ट कीजिए

(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।

उत्तर

यहाँ भाव है कि मैंने ये जीवन उस प्रभु की कृपा से पाया था। इसलिए मैंने उसके पास पहुँचने के लिए कठिन साधना चुनी परन्तु इस चुनी हुई राह से उसे ईश्वर नहीं मिला। मैंने योग का सहारा लिया ब्रह्यरंध करते हुए मैंने पूरा जीवन बिता दिया परन्तु सब व्यर्थ ही चला गया और जब स्वयं को टटोलकर देखा तो मेरे पास कुछ बचा ही नहीं था अर्थात्‌ काफी समय बर्बाद हो गया और रही तो खाली जेब।

(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,

न खाकर बनेगा अहंकारी।

उत्तर

भाव यह है कि भूखे रहकर तू प्रभु साधना नहीं कर सकता अर्थात्‌ व्रत पूजा करके भगवान को नहीं पा सकता अपितु हम अहंकार के वश में वशीभूत होकर राह भटक जाते हैं। (कि हमने इतने व्रत रखे आदि)