रचना के अनुसार वाक्य के भेद

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वाक्य की परिभाषा:- ऐसा सार्थक शब्द-समूह, जो व्यवस्थित हो तथा पूरा आशय प्रकट कर सके, वाक्य कहलाता है।

वाक्य में निम्नलिखित बातें होती हैं:

• वाक्य की रचना शब्दों (पदों) के योग से होती है।

• वाक्य अपने में पूर्ण तथा स्वतंत्र होता है।

• वाक्या किसी-न-किसी भाव या विचार को पूर्णत: प्रकट कर पाने में सक्षम होता है।

वाक्य के प्रकार

1. सरल वाक्य-सरल वाक्य में एक ही क्रिया होती है। अत: यह एक ही वाक्य होता है। इसमें उपवाक्य नहीं होते; जैसे- कल दिल्ली जाना है। इस वाक्य में एक ही क्रिया-जाने की हो रही है।

सरल वाक्य के घटक- उद्देश्य तथा विधेय। वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए (कर्ता) वह उस वाक्य का उद्देश्य है और उद्देश्य के विषय में जो कहा जाए (क्रिया) वह विधेय है। इन दोनों के योग से ही वाक्य संरचना के स्तर पर पूर्ण होता है।

2. संयुक्त वाक्य-संयुक्त वाक्य में आने वाले सभी उपवाक्य ’स्वतंत्र उपवाक्य’ होते हैं। स्वतंत्र उपवाक्य से तात्पर्य यही है कि इनका प्रयोग भाषा में अलग से स्वतंत्र रूप में हो सकता है। संयुक्त वाक्यों में आए उपवाक्य ’समान स्तर’ के उपवाक्य होते हैं। यहाँ न कोई उपवाक्य किसी से बड़ा होता है और न कोई किसी से छोटा। इसलिए संयुक्त वाक्यों के उपवाक्यों को समानाधिकृत उपवाक्य अथवा समानाधिकरण उपवाक्य भी कहते हैं; जैसे

• मोहन दिल्ली और शीला यहीं रहेगी।

• माता जी बाज़ार गईं और बच्चों के लिए खिलौने लाई।

• यहांँ आप रह सकते हैं या आपका भाई रह सकता है।

संयुक्त वाक्यों के भेद-संयुक्त वाक्यों के भेद इस आधार पर किए जाते हैं कि उनके उपवाक्य परस्पर किन संबंधों के आधार पर जुड़े हैं। सामान्यत: ये संबंध चार प्रकार के होते हैं-

• संयोजक संयुक्त वाक्य

• विभाजक संयुक्त वाक्य

• विरोधवाचक संयुक्त वाक्य

• परिणामवाची संयुक्त वाक्य

1. संयोजक संयुक्त वाक्य-जिन संयुक्त वाक्यों में उपवाक्य दो कार्य-व्यापारों या स्थितियों को जोड़ने का कार्य करते हैं; जैसे-

• मैं दिल्ली गया था और मेरी पत्नी आगरा।

• यहाँ मैं बैठूँगाा तथा उधर दूसरे लोग बैठेंगे।

• आपके लिए खिचड़ी बनी है एवं मेरे लिए चावल।

2. विभाजक संयुक्त वाक्य-जिन संयुक्त वाक्यों में आ उपवाक्यों से दो स्थितियों या कार्य-व्यापारों के बीच विकल्प दिखाया जाए या एक को स्वीकार किया जाए तथा दूसरी को त्यागा जाए, वे विभाजक संयुक्त वाक्य कहे जाते हैं। जैसे-

• आप पहुँच जाएँगे या मैं आपको फोन करूँ?

• ठीक से काम करो अथवा नौकरी छोड़ दो।

• आप मेरे साथ रहेंगे कि मदन मोहन के साथ?

• न तो शीला ही आई, न अपने बेटे को ही भेजा।

3. विरोधवाचक संयुक्त वाक्य-जब उपवाक्यों के बीच विरोध या विरोधाभास का बोध हो तो ऐसे संयुक्त वाक्य विरोधवाची संयुक्त वाक्य कहे जाते हैं। ये प्राय: मगर, पर, लेकिन, बल्कि आदि अव्ययों से जुड़े रहते हैं; जैसे-

• वह खेलने में तो अच्छा है मगर पढ़ाई-लिखाई नहीं करता।

• मैंने उसे बहुत समझाया पर वह नहीं मानी।

• हम जाना नहीं चाहते थे लेकिन आपके पिता जी नहीं माने।

4. परिणामवाची संयुक्त वाक्य- जब एक उपवाक्य से कार्य का तथा दूसरे से उसके परिणाम का बोध हो तो वे परिणामवाची संयुक्त वाक्य कहे जाते हैं। इनके उपवाक्य प्राय: इसलिए, अत:, सो आदि अव्ययों से जुड़े रहते हैं; जैसे-

• आज बाज़ार बंद है इसलिए कुछ नहीं मिलेगा।

• वह बहुत बीमार था अत: चुप ही बैठा रहा।

• वह आना नहीं चाहती थी सो झूठ बोलकर चली गई।

3. मिश्र वाक्य- संयुक्त वाक्यों में जहाँ प्रत्येक उपवाक्य स्वतंत्र उपवाक्य होता है, वहाँ मिश्र वाक्यों में एक उपवाक्य तो स्वतंत्र उपवाक्य होता है। तथा शेष उपवाक्य स्वतंत्र उपवाक्य पर आश्रित रहने के कारण ’आश्रित उपवाक्य’। स्वतंत्र उपवाक्य को ’प्रधान उपवाक्य’ भी कहा जाता है;

प्रधान उपवाक्य

आश्रित उपवाक्य

मैं उस लड़की से मिला था

जिसकी किताब खो गई थी।

मैंने वहीं मकान खरीदा है

जहाँ आप रहते हैं।

पिता जी ने मुझसे कहा

कि वे बहुत बीमार हैं।

आश्रित वाक्य -अन्य उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर आश्रित होने के कारण आश्रित उपवाक्य कहलाते हैं।

आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं-

• संज्ञा उपवाक्य युक्त मिश्र वाक्य

• विशेषण उपवाक्य युक्त मिश्र वाक्य

• क्रियाविशेषण उपवाक्य युक्त मिश्र वाक्य।

क्रियाविशेषण उपवाक्य की परिभाषा- जो उपवाक्य क्रियाविशेषण पदबंध के स्थान पर प्रयुक्त हो सकते हैं, वे क्रियाविशेषण उपवाक्य कहलाते हैं।

क्रियाविशेषण उपवाक्य के भेद निम्नलिखित हैं-

1. समयवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे-

• जब मैं दिल्ली में रहता था बहुत काम करता था।

• जब आपका फोन आया मैं नहा रहा था।

2. स्थानवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे

• जहाँ वे रहते हैं वहीं एक मंदिर भी है।

• यह वही जगह है जहाँ आपने झंडा गाड़ा था।

3. रीतिवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे

• जैसा मैं चाहता हूँ वैसा ही होता है।

• जैसा वह गाती है वैसा कोई नहीं गाता।

4. परिणामवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे

• ज्यों-ज्यों वह बड़ा हो रहा है (त्यों-त्यों) मूर्ख होता जा रहा है।

• जितना तुम मुझे चाहते हो उतना मैं न कर पाऊँगा।

5. कारणवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे

• मैं नहीं पहुँच सकूँगा क्योंकि मेरा बेटा बीमार है।

• डॉक्टर (चिकित्सक) ने मरीज़ को इसलिए बुलाया कि वह उसे दवाई पिला सके।

• मैं इसलिए न आ सका कि मेरी तबियत खराब थी।

6. शर्तवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे:

• यदि तुम चाहो तो वापस लौट जाओ।

• अगर मेरी बात मानोगी तो सुखी रहोगी।

7. विरोधवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे

• हालांकि मेरे पास रहने की जगह थी (फिर भी) मैंने किराए का मकान ही लिया।

• चाहे तुम कुछ भी कर लो (तो भी) वह नहीं मानेगी।

8. प्रयोजन क्रियाविशेषण उपवाक्य :

जैसे

• दरवाजा बंद कर दो ताकि बिल्ली न आ जाए।

• केतली का ढक्कन बंद कर दो जिससे भाप न निकले।

• जैसी लड़की मैं चाहता था वैसी ही मिल गई है।

रूपांतरण या रचनांतरण-एक वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्य में परिवर्तित करना रूपांतरण या रचनांतरण कहलाता है।

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