समास

Doorsteptutor material for IAS is prepared by world's top subject experts: Get complete video lectures from top expert with unlimited validity: cover entire syllabus, expected topics, in full detail- anytime and anywhere & ask your doubts to top experts.

समास की परिभाषा- ’समास’ वह शब्द रचना है जिसमें अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्द मिलकर किसी अन्य स्वतंत्र शब्द की रचना करते हैं।

समास में रचना में दो शब्द (पद) होते हैं। पहला पद पूर्व पद कहा जाता है और दूसरा पद उत्तर पद तथा इन दोनों के समास से बना नया शब्द समस्त पद कहलाता है; जैसे

पूर्व पद और उत्तर पद

समस्त पद

पूर्व पद और उत्तर पद

समस्तपद

दश हैं जिसके आनन

दुशानन

राजा का पुत्र

राजपुत्र

घोड़े पर सवार

घुड़सवार

यश को प्राप्त

यशप्राप्त

समास -विग्रह-जब समस्तपद के सभी पद अलग-अलग किए जाते हैं, तब उस प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं; जैसे- ’सीता-राम’ समस्त पद का विग्रह होगा- सीता और राम।

समास प्रक्रिया से शब्द -निर्माण

हिन्दी में समास प्रक्रिया के अंतर्गत तीन प्रकार से शब्दों की रचना हो सकती है:

§ तत्सम- तत्सम शब्दों के समास से; जैसे- राष्ट्र+पिता = राष्ट्रपिता, राजा का पुत्र =राजपुत्र, स्नान के लिए गृह = स्नानगृह

§ तद्भव-तद्भव शब्दों के समास से; जैसे- घोड़े पर सवार = घुड़सवार, चार, पाई =चारपाई, बैलो की गाड़ी = बैलगाड़ी

§ विदेशी- विदेशी शब्दों के समास से; जैसे-हवा का जहाज = हवाईजहाज, आराम के लिए गाह = आरामगाह, जेब के लिए खर्च = जेबखर्च

समास के भेद-समास के निम्नलिखित चार प्रमुख भेद हैं:

§ तत्पुरुष समास (द्विगु समास, कर्मधारय समास)

§ बहुव्रीहि समास

§ द्वंद्व समास

§ अव्ययीभाव समास।

नोट- संस्कृत में द्विगु तथा कर्मधारय समास को अलग भेद माना गया है, लेकिन हिन्दी में इनकी चर्चा तत्पुरुष समास के अंतर्गत ही की जाती है।

1. तत्पुरुष समास-जहाँ पूर्व पद विशेषण होने के कारण गौण तथा उत्तर पद विशेष्य होने के कारण प्रधान होता है, वहाँ तत्वपुरुष समास होता है। इस प्रकार तत्पुरुष समास में सदैव पूर्व पद ’गौण तथा उत्तर पद ’प्रधान’ होता है। जैसे- आनंदमग्न = आनंद में मग्न, ज्ञानयुक्त = ज्ञान से युक्त, नगरवास = नगर में वास, भूदान = भू का दान

सामान्य: तत्पुरुष समास दो प्रकार से बनते हैं:

संज्ञा और संज्ञा के समास से;

जैसे-

§ युद्ध का क्षेत्र = युद्धक्षेत्र

§ स्नान के लिए गृह = स्नानगृह

§ घोड़े पर सवार = घुड़सवार

§ देश का वासी = देशवासी

संज्ञा और क्रियामूलक शब्दों के समास से;

जैसे

• शरण में आगत = शरणागत

• आप पर बीती = आप पर बीती

• पथ से भ्रष्ट = पथभ्रष्ट

तत्पुरुष समास के उपभेद- तत्पुरुष समास के दो उपभेद हैं-

कर्मधारय समास और द्विगु समास।

चूँकि इन दोनों में ही उत्तर पद प्रधान होता है, अत: इन्हें कर्मधारय के अंतर्गत ही लिया जाता है।

(क) कर्मधारय समास-कर्मधारय समास वहाँ होता है, जहाँ पूर्व पद ’विशेषण’ और उत्तर पद ’विशेष्य’ होता है। पूर्व पद तथा उत्तर पद में उपमेय-उपमान संबंध भी हो सकता है।

जैसे-

समस्द पद

विशेषण

विशेष्य

नीलकंठ

नीला है जो कंठ

नीला कंठ

नीलकमल

नीला है जो कमल

नीला कमल

समस्त पद

उपमान

उपमेय

घनश्याम

घन के समान

श्याम

नरसिंह

नर रूपी

सिंह

चरणकमल

कमल के समान

चरण

देहलात

देह रूपी

लता

(ख) द्विगु समास- द्विगु समास में भी उत्तर पद ’प्रधान’ होता है और विशेष्य होता है, जबकि पूर्व पद ’सख्यावाची विशेषण’ होता है। अर्थ की दृष्टि से यह समास समूहवाची होता है;

जैसे-

• अष्टाध्यायी- आठ अध्यायों का समाहार

• चारपाई- चार पैरों का समाहार

• नवरत्न-नव रत्नों का समाहार

• सतसई- सात सौ दोहों का समूह

• सप्ताह- सात दिनों का समूह

2. बहुव्रीहि समास- बहुव्रीहि समास वहाँ होता है, जहाँ समस्त पद में आए दोनों ही पद गौण होते हैं तथा ये दोनों मिलकर किसी तीसरे पद के विषय में कुछ कहते हैं और यह तीसरा पद ही ’प्रधान’ होता है।

जैसे-

• सुलोचना-सुंदर हैं लोचन जिसके-वह स्त्री

• कमलनयन-कमल के समान हैं नयन जिसके- विष्णु

• गगनचुंबी- गगन को चुमने वाला/वाली-

• घनश्याम- वह जो घन के समान श्याम है- श्रीकृष्ण

3. द्वंदव समास-जिस समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं, कोई भी गौण नहीं होता उसे द्वंद्व (जोड़ा, युग्म) समास कहते हैं। इसमें दोनों पदों को जोड़ने वाले समुच्चयबोधक अव्यय का लोप हो जाता है; जैसे-

समस्तपद

विग्रह

अन्न-जल

अन्न और जल

आजकल

आज और कल

ग्गाां-यमुना

ग्गाां और यमुना

नदी-नाले

नदी और नाले

4. अव्ययीभाव समास

जिस समास में पूर्व-पद अव्यय हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं; अर्थात अव्ययीभाव समास में पूर्व-पद अव्यय होता है और इस कारण समस्त पद भी अव्यय बन जाते है।

जैसे-

समस्त पद

अव्यय

विग्रह

प्रतिदिन

प्रति

दिन दिन

आमरण

मरण तक

यथासमय

यथा

समय के अनुसार

अनुरूप

अनु

रूप के योग्य

विभिन्न समासों में अंतर-

कर्मधारय तथा बहुव्रीहि में अंतर-इस प्रकार कर्मधारय तथा बहुव्रीहि समास में अंतर यही है कि कर्मधारय में पूर्व पद ’गौण’ तथा उत्तर पद ’प्रधान’ होता है, जबकि बहुव्रीहि में दोनों पद ’गौण’ तथा कोई तीसरा पद ’प्रधान’ होता है।

दविगु समास और बहुव्रीहि समास में अंतर-द्विगु समास में समस्तपद का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और दूसरा पद उसका विशेष्य, परन्तु बहुव्रीहि समास में पूरा (समस्त) पद ही विशेषण का काम करता है।

कर्मधारय समास और द्विगु समास में अंतर- कर्मधारय समास में समस्तपद का एक पद गुणवाचक विशेषण और दूसरा विशेष्य हेता है, परन्तु द्विंगु में पहला पद संख्यावाचक विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है; जैसे

परमानंद

परम आनंद

(कर्मधारय)

चतुर्वर्ण

चार वर्ण

(द्विगु)

नीलांबर

नीला अंबर

(कर्मधारय)

त्रिफला

तीन फलों का समूह

(द्विगु)

ध्यान देने योग्य

§ परस्पर संबंध रखने वाले दो या दो से अधिक पदों का मेल समास कहलाता है।

§ पदों के मेल से बना शब्द समस्त पद कहलाता है।

§ सामाजिकक शब्द के पदों को अलग करने की प्रक्रिया समास-विग्रह कहलाती है।

§ समास करते समय विभक्ति चिन्ह का लोप हो जाता है।

§ कर्मधारय एवं द्विगु तत्पुरुष समास के ही उपभेद हैं। कर्मधारय के दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपयमेय संबंध होता है। द्विगु समास का पूर्व पद संख्यावाची होता है।

§ बहुव्रीहि समास में दोनों पद अप्रधान होने के कारण कोई अन्य पद प्रधान होता है।