वचन

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वचन की परिभाषा- शब्द के जिस रूप से एक अथवा अनेक का बोध होता है उसे ’वचन’ कहते हैं। जैसे-लड़का-लड़के, किताब-किताबें आदि।

हिन्दी में वचन दो होते हैं-वचन की पहचान संज्ञा अथवा क्रिया-पदों से होती है।

एकवचन-जहाँ किसी एक वस्तु का बोध होता है वहांँ एकवचन होता हैं- जैसे-किताब, दुकान, कलम, कागज आदि।

बहुवचन- जहाँ एक से अधिक बोध होता हैं वह बहुवचन होता हैं- जैसे-किताबे, कलमें, दुकानें आदि।

गणनीय तथा अगणनीय संज्ञा शब्द-कुछ संज्ञाओं की गिनती की जा सकती है और कुछ की नहीं। उदाहरण के लिए किताबे, चारपाई, तकिए, आदि ऐसी संज्ञाएँ हैं जिनको हम गिन सकते हैं लेकिन दूध, पानी, दही आदि को गिना नहीं जा सकता। इनकी तो केवल नाप-तौल ही कर सकते हैं। जिन संज्ञाओं की गिनती की जा सकती है वे गणनीय संज्ञा शब्द कहे जाते हैं तथा जिनकी गिनती करना संभव नहीं उनको अगणनीय संज्ञा शब्द कहते हैं। दोनों प्रकार की संज्ञाओं में प्रमुख अंतर इस प्रकार है:

गणनीय संज्ञा

अगणनीय संज्ञा

इनकी गिनती करके बताया जा सकता है कि कौन-सा समूह बड़ा है और कौन-सा छोटा।

इनकी गिनती नहीं की जा सकती। केवल नाप-तौल कर के ही बता सकते है कि कौन अधिक है और कौन कम।

इनके साथ संख्यावाची विशेषणों का प्रयोग हो सकता है; जैसे- दस किताबें, पाँच लड़के आदि।

इनके साथ केवल परिमाणवाची विशेषण ही लग सकते हैं; जैसे बहुत आटा, पाँच लीटर तेल आदि।

जातिवाचक संज्ञाएँ इस वर्ग में आती हैं।

इस वर्ग में समूहवाचक (एकवचन में प्रयुक्त), द्रव्यवाचक तथा भाववाचक संज्ञाएँ आती हैं।

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