CBSE Summary कक्षा-10 अध्याय-2 बहुपद (Polynomials) (For CBSE, ICSE, IAS, NET, NRA 2022)

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बहुपद (Polynomials)

बहुपद – बहुपद एक व्यंजक होता जिसमें एक या एक से अधिक पद हो सकते हैं। वैसे बहुपदका शाब्दिक अर्थ होता है ‘बहुतसारेपद’ ।

सभी बहुपद, व्यंजक हो सकते हैं परंतु सभी व्यंजक, बहुपद नहीं हो सकते।

कोई व्यंजक, बहुपद नहीं होता यदि - चर पर करणीचिन्ह (Root) लगा हो।

चर की घात ऋणात्मक न हो।

बहुपदकीघात – बहुपदमें सबसे बड़ी घात, बहुपदकी घात होती है। रैखिकबहुपद – जिस बहुपद की घात 1 हो। रैखिकबहुपद का व्यापकरूप इस प्रकार का होता है (a और b वास्तविक संख्याएँ हैं और a शून्य नहीं है।) द्विघात बहुपद – जिस बहुपद की घात 2 हो। द्विघात बहुपद का व्यापकरूप इस प्रकार का होता है (a, b और c वास्तविक संख्याएँ हैं और a शून्य नहीं है।) त्रिघातबहुपद – जिस बहुपदकी घात 3 हो। त्रिघातबहुपद का व्यापकरूप इस प्रकारका होता है (a, b, c और d वास्तविकसंख्याएँ हैं और a शून्य नहीं है।) शून्यक – बहुपदमें चर का वहमान जिसको बहुपद में प्रतिस्थापितकर ने पर, पुरे बहुपद का मान शून्य हो जाता है।

किसी बहुपद का ग्राफ x-अक्ष को जितनी जगह पर प्रतिच्छेद करता है, उस बहुपद के उतने ही शून्य कहोते हैं और जिन बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करता है वे ही बहुपद के शून्यक होते हैं।

द्विघात बहुपद में:- शून्यकों का योग = शून्यकों का गुणनफल

त्रिघातबहुपद में:- शून्यकोंकायोग =

शून्यकों का गुणनफल =

माना A, B और Y किसी त्रिघात बहुपदके शून्यक है, तो इन में यह सम्बन्ध होता है - AB + BC + CA = x का गुणांकx3 का गुणांक

किसी अज्ञात बहुपद के शून्यकों का योग और गुणनफल दिया होने पर, बहुपद ज्ञात किया जा सकता है।

बहुपद के शून्यकों की सत्यता की जाँच के लिए, दिए गए शून्यक को x की जगह प्रतिस्थापित करने पर यदि बहुपद का मान शून्य आजाए तो शून्यक है अन्यथा नहीं है।

यदि किसी बहुपद g (x) से बहुपद p (x) को भाग देने पर शेष शून्यआ जाए तो बहुपद g (x) बहुपद p (x) का एक गुणनखंड होता है।

यदि g (x) और p (x) कोई दो बहुपद हैं जहाँ g (x) शून्य नहीं है, तो हम g (x) से p (x) को भाग देकर ऐसे बहुपद q (x) और r (x) ज्ञात कर सकते हैं कि –

(जहाँ या r (x) की घातकी घातहै।)

इस निष्कर्षको बहुपदों विभाजनएल्गोरिथ्म कहा जाता है। किसी बहुपद का एक शून्यक ज्ञात हो तो हम दूसरा शून्यक उसी शून्यक से बहुपद में भाग दे कर भाग फलके रूपमें ज्ञात करते हैं।

किसी बहुपद के दो या दो से अधिक शून्यक ज्ञात हो तो हम अन्य शून्यक ज्ञात कर सकते हैं। पहले दिए गए शून्यकों का गुणनफल ज्ञात करो और गुणनफल से बहुपदमें भाग करो और भाग फल के गुणनखंड करके अन्य शून्यकज्ञात करो।

किसी बहुपद p (x) के शून्यक उन बिंदुओं के x-निर्देशांक होते हैं जहाँ का ग्राफ x-अक्षको प्रतिच्छेद करता है।

किसी बहुपदके अधिकतम शून्यक बहुपदकी घात के बराबर होते हैं।

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