CBSE Summary कक्षा-10 अध्याय-5 समांतरश्रेढ़ी (Arithmetic Progression) (For CBSE, ICSE, IAS, NET, NRA 2022)

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समांतरश्रेढ़ी (Arithmetic Progression)

  • समांतरश्रेढ़ी (A. P.) – संख्याओं की वह सूचिजिसमें पहले पद को छोड़कर शेष सभी पद अपने पद में एक निश्चित संख्या जोड़कर प्राप्त होते हैं।
    • जैसे इसे समांतरश्रेढ़ी का व्यापकरूप (General form) कहते हैं।
  • सार्वअंतर (deviation) – समांतरश्रेढ़ीमें जो निश्चित संख्या प्रत्येक पद में जोड़कर अगला पद प्राप्त किया जाता है, उसे सार्वअंतर कहा जाता है। समांतरश्रेढ़ीका सार्वअंतर धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य भी हो सकता है।
  • सार्वअंतर
  • जिस A. P. का अंतिमपद ज्ञात हो, उसे परिमित A. P. कहते हैं, और जिस A. P. का अंतिमपद ज्ञात नहो, उसे अपरिमित A. P. कहते हैं।
  • A. P. का n वां पद (an) – यदि किसी A. P. में n पद हैं तो an इसका अंतिम पद होता है। A. P. का n वांपद ✓ के माध्यमसे ज्ञात किया जाता है। a5 का अर्थ है, A. P. का 5 वां पद
  • कुछ प्रश्नोंको हलकरने के लिए पहले दिए गए आँकड़ों से A. P. बनाते हैं फिर जब प्रथमपद (a) और सार्वअंतर (d) ज्ञात हो जाए, तब आगे हल करते हैं। परिमित A. P. दी होने पर यदि अंतिमपद से n वांपद ज्ञात करनेको कहा जाए तो A. P. को उल्टा कर दो अर्थात अंतिमपदको पहलापद मान लो फिर हल करो। A. P. केप्रथम n पदोंकाजोड़ या या या
  • A. P. के ज्यादातर प्रश्नों को हलकरने में का प्रयोग किया जाता है। किसी भी प्रश्न को सूत्र के माध्यमसे हलकर ते समय यह सुनिश्चित करलें कि क्या हमें कोई मान ज्ञात करनेके लिए पर्याप्त आँकड़े दिए गए हैं यदि नहीं तो पहले उन सभी आँकड़ोंको ज्ञात करो जो सूत्र के लिए पर्याप्त हो। A. P. के योगवाले प्रश्नों में n ज्ञात करते हुए सूत्रद्विघातीयसमीकरण के रूप में परिवर्तित हो जाता है, जहाँ हमें n का मान ज्ञात करने के लिए गुणनखंड करने पड़ते हैं।
  • इस प्रकार आपको n के दो मान मिलेंगे जिनमें से एक या दोनों मान सम्भव हो सकते हैं। प्रथम n धनपूर्णांकों का योग यदि a, b, c एक A. P बनाते हैं तो तथा b को a और c का समांतरमाध्य कहतेहैं। समांतरश्रेढ़ी (A. P.) का प्रयोग विभिन्न समस्याओं को हल करनेमें किया जाता है, जिनमें संख्याओं की सूचि में हमें सार्वअंतर समान प्राप्त होता है।

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