CBSE Summary कक्षा-9 अध्याय-1 संख्या पद्धति (Number System) (For CBSE, ICSE, IAS, NET, NRA 2022)

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संख्यापद्धति (Number System)

प्राकृतिक संख्याऐं:-

गणन संख्याऐं अर्थात गिनने वाली संख्याओं को प्राकृतिक या प्राकृतसंख्या कहते हैं। इन्हें धनात्मक संख्याऐं भी कहते हैं। इन्हें N द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

उदाहरण:

पूर्ण संख्याऐं:-

प्राकृतिकसंख्याओं में शून्य (Zero) को शामिलकर लेने पर पूर्णसंख्याओं का संग्रह प्राप्त होता है। इन्हें W से प्रदर्शित करते हैं।

उदाहरण:

ऋणात्मक संख्याऐं:-

जिन संख्याओं के आगे ऋण (Minus) का चिन्ह होता है उन्हें ऋणात्मकसंख्याऐं

उदाहरण

पूर्णांक:-

पूर्ण संख्याओं और ऋणात्मकसंख्या ओे के संग्रहको पूर्णांक कहते हैं।

उदाहरण:

परिमेयसंख्याऐं:-

जिन संख्याओं को p/q के रूपमें लिखाजा सके जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा q एकशून्येतर (non-zero) पूर्णांक है। इन्हें r से दिखाते हैं।

उदाहरण:

किसीभी परिमेय संख्या (उदाहरण के तौरपर ) के अंशवहर में समान संख्या से गुणाकरने पर उस संख्या कामान नहीं बदलता बल्कि वह उस संख्या की तुल्य परिमेय संख्या कहलाती है। किसी भी संख्या की अनगिनत तुल्य संख्याऐं होती हैं।

दो परिमेय संख्याओं के बीच की संख्या निकालने के लिए चरण:- (विधि - 1)

  • दो नों परिमेय संख्या ओं को जोड़ो
  • योगमें 2 से भाग करो
  • यही बीचकी संख्या है। (विधि -2) अंश और हर की स्थिति में
  • पहली परिमेय संख्या के अंश और हर में दूसरी परिमेय संख्याके हर से गुणा करो
  • दूसरी परिमेय संख्या के अंश और हर में पहली परिमेय संख्याके हर से गुणा करो (अब दोनों के हर बराबर हैं)
  • छोटीवाली परिमेयसंख्याके अंश से लेकर बड़ीवाली तक अंश को बढ़ाते-बढ़ाते अनेक संख्याऐं निकल जाएँगी
  • दो परिमेयसंख्याओं के बीच में असंख्यपरिमेय संख्याऐं होती हैं।

अपरिमेय संख्या:-

जिन संख्या ओं को के रूप में व्यक्त नहीं कर सकते, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q शून्य नहीं है। इन्हें S से दर्शाते हैं।

उदाहरण:

परिमेय तथा अपरिमेयसंख्याओं के संग्रह को वास्तविकसंख्याऐं कहते हैं।

√ 2, √ 3, √ 5 का संख्यारेखा पर प्रदर्शन:-

  • रेखाखण्ड OP खींचिये
  • रेखाखण्ड लम्ब खींचिये
  • अब लम्ब खींचिये
  • इसी प्रकार पर खींचिये
  • इस प्रकार आपको बिंदु मिलजाएंगे इन्हें मिलाकरमिलजाएंगे
  • जब एकसंख्या को दूसरी संख्यासे गुणा करते हैं तो निम्नप्रकार के परिणाम प्राप्त होते हैं – शेषफल शून्य हो जाता है या खुदकी ही पुनरावृत्ति शुरू कर देता है|

शेषोंकी पुनरावृत्ति श्रृंखला में प्रविष्टि यों की संख्याभाजक से कम होती है शेषोंकी पुनरावृत्ति होती है तो भागफल में अंकोंका एक पुनरावृत्तिखण्ड प्राप्त होता है।

  • यदि शेष शून्य हो जाता है, ऐसी संख्या ओं के दशमलव प्रसार को सांतदशमलव कहते हैं।

उदाहरण:

(इस प्रकारकी संख्याऐं परिमेय होती हैं)

  • कुछ चरणोंके बाद दशमलवकी पुनरावृत्ति होने लगती है या भागफल में अंकोंका एकपुनरावृत्तिखण्ड प्राप्त होता है इस प्रकार के दशमलवप्रसारको अनवसानीआवर्ती कहतेहैं।

उदाहरण: (इस प्रकारकी संख्याऐं परिमेय होती हैं)

  • यदि भाग फलमें अनियमित रूप से विभिन्नप्रकार की संख्याऐं प्राप्त होती हैं तो इस प्रकारके दशमलवप्रसारकी अनवसानीअनावर्ती कहा जाता है। उदाहरण:

(इस प्रकार की संख्याऐं अपरिमेय होती हैं)

दशमलव संख्याओं का संख्या रेखा पर प्रदर्शन:-

उदाहरणके तौर को संख्या रेखा पर दिखाना है -

  • हम सख्याको देखकर बता सकते हैं कि यह संख्या 3 और 4 के बीच स्थित है
  • संख्यारेखा खींचिये और उस पर बायीं ओर 3 तथा दायीं ओर 4 अंकित करो
  • संख्यारेखाको 10 बराबर भागों में बाँटिये
  • सभी बिंदुओंको अंकित करो
  • पुनःएक नई संख्यारेखा खींचिये उस पर बायीं ओर 3.4 और दायीं ओर 3.5 अंकित करो बीच के सभी बिंदुओंको अंकित करो
  • ⚹ पुनःएक नई संख्यारेखा खींचिये उस पर बायीं और 3.44 और दायीं ओर 3.45 अंकित करो बीचके सभी बिंदुओंको भी अंकित करो
  • बस आपका उत्तर इसी रेखा परहै 3.445 इसे गोले से घेरदो

परिमेय + अपरिमेय = अपरिमेय

परिमेय - अपरिमेय = अपरिमेय

परिमेय x अपरिमेय = अपरिमेय

परिमेय ÷ अपरिमेय = अपरिमेय

  • यदि दो अपरिमेय संख्याओं को परस्पर जोड़ें, घटायें, गुणाकरें या भाग करें तो परिणाम कुछ भी हो सकता है परिमेय भी और अपरिमेय भी।
  • करणीचिन्ह वाली संख्याओं का जोड़, घटा, गुणा, भाग लगभग सामान्य परिमेय संख्याओं की तरह ही है

कुछ यादरखने योग्य सर्वसमिकाएं (जबकि a और b धनात्मक वास्तविक संख्याऐं हैं)

हर का परिमेयकरण करना:-

  • उदाहरणके तौर पर के हर का परिमेय करण करना है -
  • जैसाकी आप जानतेहैं कि अंशवहर में समान संख्या से गुणाकर देने पर संख्या का मान नहीं बदलता तो
  • के अंशवहर में से गुना करते हैं
  • अब संख्या का हर 2 है जो कि एक परिमेय संख्या है।

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