CBSE Summary कक्षा-9 अध्याय-2 बहुपद (Polynomials) (For CBSE, ICSE, IAS, NET, NRA 2022)

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बहुपद (Polynomials)

  • चर (variable) : चर वह प्रतीक होता है जो कोई भी वास्तविक मानधारण कर सकता है। चरों को आदि से प्रकट किया जाता है।
  • अचर (non-variable) : संख्यात्मकमान को अचरराशि कहा जाता है।
  • एक चर वाले बहुपद (polynomial in one variable) : वे बहुपद जिनमें केवल एकही चरराशिका प्रयोग किया जाए एकचरवाले बहुपद कहलाते हैं।
  • बहुपदके पद: धन (plus) और ऋण (minus) के चिन्हपदोंको अलग करते हैं, इसके माध्यमसेहमपदोंको गिनकर बता सकते हैं। जैसे - इस व्यंजकमें और 7 तीनपद हैं।
  • बहुपद के प्रत्येक पदका एक गुणांक (coefficient) होता है।
  • जैसे - में का गुणांक x दूसरेपद में x का गुणांक

तीसरे पद में X का गुणांक ~-1

  • अचरबहुपद: संख्याऐं भी एक प्रकार की बहुपद ही होती हैं।आदि अचरबहुपदके उदाहरण हैं।
  • अचरबहुपद शून्यको ‘शून्यबहुपद’ कहते हैं।
  • अगर व्यंजकमें चर का घातांक पूर्णसंख्या नहीं होती तो वह व्यंजक ‘बहुपद’ नहीं हो सकता।
  • एकपद वाले बहुपद को एकपदी (monomial) , दो पद वाले बहुपदको द्विपदी (binomial) और तीनपद वाले बहुपद को त्रिपदी (trinomial) बहुपद कहते हैं।
  • बहुपदमें चरकी अधिकतम घात वाले पदकी घातको ‘बहुपदकी घात’ (degree of polynomial) कहतेहैं।
  • एक शून्येत्तर (non-zero) अचर बहुपदकी घात शून्य होती है।
  • एकचर में बहुपद वही व्यंजक होता है जिसमें चर:-
  • करणी चिन्ह (Radical Sign) के साथ नहो चर की घात पूर्णसंख्या हो किसी भिन्नका हर नहो

बहुपद का शून्यक:-

किसीभी बहुपदका शून्यक चर का वह मान होता है जिसके कारण बहुपदका मान शून्यहो जाता है।

शून्येतर अचर बहुपदका कोई शून्यक नहीं होता।

प्रत्येक वास्तविकसंख्या शून्यबहुपदका शून्यक होती है।

उदाहरण: क्या 2 और -2 बहुपद x + 2 के शून्यक है या नहीं?

हल:

  • -2 बहुपदका शून्यक है परंतु 2 बहुपदका शून्यक नहीं है।
  • यह आवश्यक नहीं है कि बहुपदका शून्यक शून्य ही हो।
  • शून्यबहुपद का शून्य कहो सकता है।
  • प्रत्येक रैखिक बहुपदका एक और केवल एक शून्यक होता है।
  • एक बहुपदके एक से अधिक शून्यक हो सकते हैं।
  • जितनी बहुपदकी घात होतीहैउसकेउतनेहीशून्यकहोतेहैं।

शेषफलप्रमेय:-

मानलीजिए

तो (स्थिति-1)

जबशेषफलकोईशून्येतरसंख्याहोतो a और c भाज्य (b) केगुणनखंड (Factor) नहींहोंगे।अर्थात b, a और c कागुणज (Multiple) नहींहोगा।

या (स्थिति-2)

  • जबशेषफलशून्यहोतब a और c भाज्य (b) के गुणनखंड कहलाते हैं। अर्थात b, a और c का गुणज होता है।
  • यदि एक बहुपद p (x) को दूसरे बहुपद g (x) से भाग दिया जाए और शेषफल शून्य बचता है तो बहुपद g (x) , बहुपद p (x) का गुणनखंड कहलाता है।
  • गुणनखंड प्रमेय: यदि एक बहुपद का शून्यक दूसरे बहुपद का शून्यक है तो छोटावाला बहुपद बड़ेवाले बहुपद का गुणनखंड होता है।

द्विघात बहुपदके गुणनखंड:-

  • द्विघात बहुपदमें तीन पद होते हैं (माना a, b, c)
  • पहलेपद (a) को तीसरेपद (c) से गुणा करो।
  • गुणनफलसे प्राप्त अचरके सभी गुणन खंड प्राप्त करो।
  • प्राप्त गुणनखंडोंमें से दो गुणन खंडों का ऐसा युग्म लिजिए जिस का गुणनफल a और c के गुणन फल के बराबर हो और साथ ही उनका योग मध्यपद के अचरपद के बराबर हो।
  • अबह में 4 पद प्राप्त होते हैं।
  • पहले दो पदों से सर्वनिष्ठ (Common) पद को छाँट कर कोष्ठक के बाहर लिखेंगे और जो बचेगा उसे कोष्ठक के अंदर लिखेंगे।
  • येही क्रिया अगले दो पदों के साथ की जायेगी।
  • अबदोनों कोष्ठकों में आपको समान पद मिलेंगे।
  • चूँकि दोनों कोष्ठकों में समान पद प्राप्त होते हैं तो हम इसे अब एकबार लिखेंगे अलग कोष्ठक में और दूसरे कोष्ठक में वेदो नों सर्वनिष्ठपद जो कोष्ठकों के बाहर लिखे हुएहैं।
  • येही बहुपद के गुणनखंड हैं।

त्रिघात बहुपदके गुणनखंड:-

  • त्रिघात बहुपदमें चार पद होते हैं (माना a, b, cऔर d
  • पहला (a) और चौथा (d) पद अपरिवर्तित रहेंगे।
  • तीसरेपदको दो भागों में विभाजित किया जायेगा। तीसरेपदके दाएँ पद का अचर भाग चौथे पद के अचरपदके बराबर होना चाहिए। शेषभाग बायाँ पक्ष होता है।
  • अब बहुपद के दूसरे पद (b) को भी दो भागों में विभाजित किया जायेगा। दाएँ पद का अचरभाग उससे अगले पद के अचरभाग के बराबर होना चाहिए बाकि बायाँ पद होगा।
  • इस प्रकार हमें 6 पदों वाला एक बहुपद प्राप्त होता है।
  • अब फिर वही क्रिया अपनाएँगेजो द्विघातबहुपदके गुणनखंड ज्ञात करने के लिए की थी। दो-दो पद लेकर और सर्वनिष्ठपद छाँटकर लिखते जाएँगे।
  • तीनों कोष्ठकों में समानपद प्राप्त होते हैं। जिसे हम अलग कोष्ठक में एक ही बार लिखेंगे। दूसरे कोष्ठकमें सर्वनिष्ठपदों को लिखेंगे जो कि एकद्विघातबहुपद होगा।
  • इस द्विघात बहुपद के फिर से गुणन खंड करेंगे जैसे हमने पहले किये थे।
  • इस प्रकार हमें गुनखण्डके रूप में तीन कोष्ठक प्राप्त होते हैं। गुणनखंडकी जाँच:-
  • यदि आपसे प्रश्न किया जाये की बहुपद बहुपद का गुणनखंड है या नहीं तो इसकी जाँच करने के लिए -
  • आपको में भाग देना होगा। यदि शेष बचता है तो का गुणनखंड नहीं होगा। और यदि शेष शून्य हो जाता है या निशेष नहीं बचता का गुणनखंड होगा।
  • कुछ विशेष सर्वसमिकाएं (Identities) होती हैं जिनके माध्यमसे बहुपदोंके गुणनफल और गुणनखंडप्राप्त किये जाते हैं। इनका याद रखना विद्यार्थी के लिए बेहदजरूरी है।